Wednesday, June 18, 2008

मेरे आँगन का पेड़ ....




मेरे आँगन का पेड़ .....



मेरे जन्म से पहले ,
मेरे
दादा ने
एक कोमल बीज को
कठोर
धरती में गाड़कर ,
मेरे
आंगन के
इस पेड़ को उसी तरह
उगाया था

जैसे
मेरे बाप ने मुझ को ....
बुढी आँखों की नीगाहे
बचपन
की तरह
अभी
भी इसके साथ जुडी है ,,
इसकी
खोखली हों चुकी जडो
और
कम होती
जमीन का अहसास

मेरे
बच्चो को
कचोटता
रहता है ..
और
वे कह देते है
" रे दद्दा इस पेड़ को

अब
तो काट डालो "
और
उनके ये शब्द
मेरे
हर्दय में
एक
कुल्हाड़ी की भाँती
घुसे
चले जाते है....