
- सड़क -(1990)
जानी पहचानी
कदमो को चूमे
आसमा के नीचे
बेफीकरे से घुमे
दुनीया दे धोखा
तो सडको का साया
महलो से निकला
तो इसी पे आया
लगती है ठोकर
चूमे जमी को
घुमे जहा भर
पाये हमी को
सर्दी में शुखी
बरखा में हंसती
गर्मी के मौसम में
दीन भर तपती
शीक्वे व शीकायत
ना कहती कीसी से
सबकी मंजील
मीलती इसी से ....
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