Sunday, June 29, 2008

बन्नों


मेरी बन्नों सजा ये तेरा रूप है....
तेरे मन में सजनवा की धुप है ...
तेरी आँखों के कोनो में संगीत है ..
तेरे दील में पीया जी का गीत है ...
तेरी आँखों की भाषा मैंने पढी है ...
जो खुमारी सजनवा की चढी है ...
मन दर्पण बना तेरी आश है..
और उसमे रचा ये स्वरूप है ...
तुझे जाना पीया जी के देश में
ख़त भेजे नीगाहों के भेष में
बन्नो तुझको हमारी ये दुआ है
रहे खुश तू पीया जी के देश में...
"हकीम" यहाँ खुशीयाँ अनेक है
पीया मीलन की बेला पर अनूप है .............

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