
कीरण तेरे नाम की
मैंने माँगी कीरण तेरे नाम की ,
सूरज से आज उधार ..
गयान बढे तेरा मान बढे ,
नहीं खाना कीसी से खार .
उस कीरण से तू मांगना ,
हों सब का सुखी संसार .
भेदभाव एक रोग समझना ,
बढे आपस में प्यार
देश भूमी मेरी माँ समाना ,
हीममत दे होऊ नीछार .
कह "हकीम" कीरण अनमोला,
ये न्याय की है तलवार ........
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