राम नाम जपा दुःख में साई
राम नाम जपा दुःख में साई,
सुमीरण नाही सूखत में आयो, दुःख में राम बडाई .
दीन हीन से पल्लो झाडा ,रहा ठाट से मैं भाई .
सुख की बंसी अवीरण बांची, दुःख में सुमीरण आई .
दान धर्म को आफत जानी ,दुःख में बना अनुयाई
लेख करम के जभु जभु देखे, क्यों तीमीर मन घबीराई
राम जपो भगवान् जपो तुम, ये करम लेख ना जाई
राम* ़ "हकीम" हर्दय संग राखो , होत ना जग में हँसाई.
* यहाँ राम का अर्थ है मानवता ,दया ,करूणा और हर प्राणी से प्रेम करना ...ना की राजा दशरथ का पुत्र ..मेरे राम तो ऐसे है जो.............
कबीरा के हर्दय में बस्ता
रवीदासा के मन में जचता
नानक दादू सब में हंसता
जो बुद्धा इसा मुसा रचता
कहे "हकीम" उसी के वचना
बनू मैं मानव है ये सपना
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