Monday, June 16, 2008

मैं कीसलीये चुप ह





मैं कीसलीये चुप हू


ये मत पूछ मुझसे ,
मैं कीसलीये चुप हू
ना ही तेरी वफ़ा ,
ना जफ़ा मैं चुप हू
ना ही दुनीया या
दुनीया की बातो के लीये
ना ही तेरे ना दुनीया
के जज्बातों के लीये
फीक्र ही कीसको है
दुनिया की बातों का
जनाजा तो नीकल चुका
अरमानों की रातों का..
दर्द का प्याला जो
पी रहा चुप हूं
यही क्या कम है
जो जी रहा चुप हूं..

No comments: