
गुरु नानक देव सहारे ,
घास पात को रहा नीहारे, फल फूल से रहा कीनारे ,,..............गुरु नानक
धन की खातीर दुनीया ठगता, ठगे नहीं वचन तीहारे ................गुरु नानक
हाड मांस खगुई सा नर्वा ,कभी पास गया ना थारे ..................गुरु नानक
जबू तोहे दील में राखन लागा ,मुझे मीले गयान के धारे ................गुरु नानक
आज "हकीम" कर्म को देखे ,मेरे गुरुआ कर्म उबारे .....................गुरु नानक
No comments:
Post a Comment