
मेरा गांव ....
माटी की हँडिया मेंसौंधी सौंधी वो
साग की खुशबू,
मेरी साँसों से
आती हुई मालूम
होती है, छप्पर की
टप टप का वो
सुरमई संगीत जो
वर्षा में
हर रोज़ बजता था और
पगडंडी की धूल का अहसास
कितना सच्चा था
जो इन् धुंआ छोडती मोटरों से
तो बहुत अच्छा था ...
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