पत्तो से सरकता
हुआ,
सुरलय ताल के साथ ,
सावन की रीम्झीम मे ,
गीरता हुआ पानी ,
बादलो से नही
पहाड की चोटी से
गिर रहा है .
सुखे पतझड पेड ,
दूर से देख रहे है ,
उस गिरते हुये पानी को ,
जो उंचा
ओर घना उंचा
होता जा रहा है ,
मरूभूमी के
विषेले हाथो से
बचने के लीये .........
