अब जन्म मीले ना और .......
तुने हीरा जन्म गवा दीया , रहा वही ढौर का ढौर ।
कोषों बीच में रहा पटा ,कबह पायो ना धन का धौर
दुग्ध वनीज का पायसा , चखो ना कण एक कौर
रतन गुरु नग जाडावा , तबहू पायी वागीशा भौर
आज "हकीम" सदाशय , बंधी अन्त्राकाय डौर .......
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