Saturday, June 21, 2008

बुद्धा प्यार के नगर से
सोचे े
ऊँची से डगर पे
मेरे शब्दों का मोल
अब बच्चा है कहा ..
प्रेम टूटा टूटा सा
इंसा रूठा रूठा सा
मेरे शब्दों का खोल
अब बच्चा है यहाँ..
प्यार झूठ की परत में
न्याय लूट की गारत में
हीनसा कुत्ता सी भोके है
भेडीया रास्ता रोके है
मेरे रंग का असर
अब रचा है कहा .........
चक्षु डूबे अशुवन में
इंसा घुमे मधुबन में
धन सबसे बड़ा है
भाग्य और भगवान्
राहे रोके खडा है
पाप धोने को यहाँ
मंदीर भी बड़ा है
दास बना ये इच्छा का
और इसकी ये सजा है .....
पाप कीतने भी करू
पाव धरती पर ना धरू
दुख सबको ये देगा
क्यों की
भगवान् है साथ तो मेरा
कोई क्या कर लेगा
छतरी की उस की लीये
जुल्म हमेशा कीये
ये भाग्य का ढोल
अब सच्चा ही यहाँ है .......

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