एतबार तो कर यु चुप ना रहो दानिश्ता शिकायत भूल भी जा
खामौश लबो कों खोल भी दे बानिश्ता ये शिकवा भूल भी जा
तकमील-ऐ-जफा अब याद ना कर अंजाम कयामत भूल भी जा
नजरो की सदा टकरा के ना मुड तासीर गुरेजां भूल भी जा
हर रोज़ नहीं एक रोज़ सही दहशत की ये बाते भूल भी जा
हमराज फकत इनकार ना कर नाहक ये सितम भूल भी जा
Sunday, August 31, 2008
इशक मासूम...
जीस्त नासूर-ऐ-गुल-ऐ-बां में जिगर सोता है
पाक दामन के गिरेबां में वस्ल होता है
शर्म दामन में फना बंदगी सा रोता है
इशक मासूम जवानी में फ़ना होता है
वस्ल मासूम कहे मुझसे सदा
जिन्दगी तेरी .... बंदगी मेरी......................गुरु कवि हकीम...
Friday, August 29, 2008
सूरज निकला आँखे मलते ..
सूरज निकला आँखे मलते
अंधियारे से चलते चलते
राह देख रही है सुबह
मन तृष्णा में जलते जलते
स्वपनिल आशा किरण पसेरी
सींचे मन में सब उजयेरी
हर्षित मन जब पाव पसारे
धूप चखु अपने हीस्से की
अंधियारा मन ढलते ढलते ....
आँखे भीगी मन मुस्काये
हँसते हँसते पलके गाये
समझ ना पाऊ जब भाषा में
खामौशी मुझे राह दिखाए
दूर छितिज पर हंसते तारे
ह्रदय वास पर जलते जलते .......
अंधियारे से चलते चलते
राह देख रही है सुबह
मन तृष्णा में जलते जलते
स्वपनिल आशा किरण पसेरी
सींचे मन में सब उजयेरी
हर्षित मन जब पाव पसारे
धूप चखु अपने हीस्से की
अंधियारा मन ढलते ढलते ....
आँखे भीगी मन मुस्काये
हँसते हँसते पलके गाये
समझ ना पाऊ जब भाषा में
खामौशी मुझे राह दिखाए
दूर छितिज पर हंसते तारे
ह्रदय वास पर जलते जलते .......
किसी का साथ नीगाहों में बस गया जब भी
दराज हों के पनाहों में बस गया जब भी
हज़ार झोके उलझते है मुख्तसर बन के
बहार हों के हवाओं में बस गया जब भी
क्यू हमसे पूछे जमाने में रहगुजर तेरी
एजाज़ हों के ज़माने में बस गया जब भी
आमादा हूँ अब सफ़र सुकूँ-ए-राहो में
पयामे हुशन सजाने में बस गया जब भी
कही चिराग से खैरामे जख्म जलता है
हुस्न-ओ-इश्क़ मनाने में बस गया भी
"हकीम" नश्तर निगाह -ए- इश्क आज चुभे
आशना हों के तरानो में बस गया जब भी
दराज हों के पनाहों में बस गया जब भी
हज़ार झोके उलझते है मुख्तसर बन के
बहार हों के हवाओं में बस गया जब भी
क्यू हमसे पूछे जमाने में रहगुजर तेरी
एजाज़ हों के ज़माने में बस गया जब भी
आमादा हूँ अब सफ़र सुकूँ-ए-राहो में
पयामे हुशन सजाने में बस गया जब भी
कही चिराग से खैरामे जख्म जलता है
हुस्न-ओ-इश्क़ मनाने में बस गया भी
"हकीम" नश्तर निगाह -ए- इश्क आज चुभे
आशना हों के तरानो में बस गया जब भी
Thursday, August 28, 2008
मैं यूही शौक से हार जाता हूँ बाजी तुझसे ॥
ताकी तुम हँसते रहो मेरे प्यार की खातिर ॥
मैं कजा कों भी हरा दुंगा अपनी हसरत से
ताकी तुम जिंदा रहो मेरे प्यार की खातिर
इश्क जाहीली में पशेमान है ये जुलो सितम
ताकी शर्मिन्दा ना हों मेरे प्यार की खातिर
कितनी फुरसत से जोड़ी ये तकसीम-ऐ-शाई
फासले दरमयां ना हों मेरे प्यार की खातिर
ऐ ग़म-ए-दुनिया तेरे गम का तस्व्वुर हूँ मैं
तू गमजदा ना रहो मेरे प्यार की खातिर
होठ ताकीद है और बेच दी गैरत "हकीम"
ताकी बंदगानी ना हों मेरे प्यार की खातिर ......
ताकी तुम हँसते रहो मेरे प्यार की खातिर ॥
मैं कजा कों भी हरा दुंगा अपनी हसरत से
ताकी तुम जिंदा रहो मेरे प्यार की खातिर
इश्क जाहीली में पशेमान है ये जुलो सितम
ताकी शर्मिन्दा ना हों मेरे प्यार की खातिर
कितनी फुरसत से जोड़ी ये तकसीम-ऐ-शाई
फासले दरमयां ना हों मेरे प्यार की खातिर
ऐ ग़म-ए-दुनिया तेरे गम का तस्व्वुर हूँ मैं
तू गमजदा ना रहो मेरे प्यार की खातिर
होठ ताकीद है और बेच दी गैरत "हकीम"
ताकी बंदगानी ना हों मेरे प्यार की खातिर ......
Wednesday, August 27, 2008
क़रार दिल में आये
मैं वाल्ले वाल्ले चालु
क़रार दिल में आये
मस्ती नज्म सी हस्ती
मुतिरब सा दिल गाये
मैं वाल्ले वाल्ले चालू
क़रार दिल में आये ....
ऐ ग़म-ए-दुनिया किलवत
चश्म-ओ-आरिज़ सी तिबयत
तस्व्वुर मन के सारे
यु दिल में गुदगुदाए
मैं वाल्ले वाल्ले चालु
क़रार दिल में आये .....
शाने शिकवा किसका
जि़न्दगानी बादा जिसका
मुनहमिक मन तेरा
तुर्बत में मुस्कराए
मैं वाल्ले वाल्ले चालु
क़रार दिल में आये ....
सदाकत इश्क -ऐ-नजरे
ख्वाब-ऐ-हकीकत सजरे
जशनो वादा ये फरदा
अहसासी गुल खिलाये
मैं वाल्ले वाल्ले चालु
क़रार दिल में आये .....
मसकन के पीछे हम भी
अहद-ए-जुबां सा गम भी
"हकीम" गीत कायल
ऐतबार मन में आये
मैं वाल्ले वाल्ले चालु
क़रार दिल में आये ..
क़रार दिल में आये
मस्ती नज्म सी हस्ती
मुतिरब सा दिल गाये
मैं वाल्ले वाल्ले चालू
क़रार दिल में आये ....
ऐ ग़म-ए-दुनिया किलवत
चश्म-ओ-आरिज़ सी तिबयत
तस्व्वुर मन के सारे
यु दिल में गुदगुदाए
मैं वाल्ले वाल्ले चालु
क़रार दिल में आये .....
शाने शिकवा किसका
जि़न्दगानी बादा जिसका
मुनहमिक मन तेरा
तुर्बत में मुस्कराए
मैं वाल्ले वाल्ले चालु
क़रार दिल में आये ....
सदाकत इश्क -ऐ-नजरे
ख्वाब-ऐ-हकीकत सजरे
जशनो वादा ये फरदा
अहसासी गुल खिलाये
मैं वाल्ले वाल्ले चालु
क़रार दिल में आये .....
मसकन के पीछे हम भी
अहद-ए-जुबां सा गम भी
"हकीम" गीत कायल
ऐतबार मन में आये
मैं वाल्ले वाल्ले चालु
क़रार दिल में आये ..
Tuesday, August 26, 2008
हम अकेले ही चले
हम अकेले ही चले....
हम अकेले ही चले
चार दिन के थे सिले
हम अकेले ही चले
दिल ये इब्दाद हुआ
इश्क बर्बाद हुआ
बंद कलियों में यहाँ
फूल देखो है खीले ,,,.............हम अकेले ही चले
प्यार तोहमत था बना
जुल्म था धुल सना
हम तो कांटो में चले
करम थे उनके भले ...............हम अकेले ही चले
सांस रोती ही रही
आस सोती ही रही
शूल यु दिल चुभे
जब वो हंसते से मिले...........हम अकेले ही चले
थक चुका लंबा सफ़र
आंसू जज्बो का हसर
हम तमाशा क्यू बने
उनके ये शिकवे गिले ..........हम अकेले ही चले
हर्फो का ये है बयाँ
खून की थी वो हया
लहू आँखों में मगर
होठ ना तब भी हिले.............हम अकेले ही चले
जज्बा यु सारा जकड
होसला अपना पकड़
बढ़ते मकसूदे कदम
जा के मंजील से मिले.............हम अकेले ही चले
चार दिन के थे सिले
हम अकेले ही चले
दिल ये इब्दाद हुआ
इश्क बर्बाद हुआ
बंद कलियों में यहाँ
फूल देखो है खीले ,,,.............हम अकेले ही चले
प्यार तोहमत था बना
जुल्म था धुल सना
हम तो कांटो में चले
करम थे उनके भले ...............हम अकेले ही चले
सांस रोती ही रही
आस सोती ही रही
शूल यु दिल चुभे
जब वो हंसते से मिले...........हम अकेले ही चले
थक चुका लंबा सफ़र
आंसू जज्बो का हसर
हम तमाशा क्यू बने
उनके ये शिकवे गिले ..........हम अकेले ही चले
हर्फो का ये है बयाँ
खून की थी वो हया
लहू आँखों में मगर
होठ ना तब भी हिले.............हम अकेले ही चले
जज्बा यु सारा जकड
होसला अपना पकड़
बढ़ते मकसूदे कदम
जा के मंजील से मिले.............हम अकेले ही चले
Monday, August 25, 2008
घर आवे साजन
हाथिये चढ़ल आयो साजन
साखी री मन मौर सा नाचे
माई री मन मोरो यु अकुलावे
आँखों के कोनो में सपने सजावे
घोड़बे चढ़ल घर आवे
साखी री मन मौर सा नाचे ....
श्याम संगे जब सन्नर महके
मुतियन आंसू जानैत दहके
कथिये चढ़ल घर चहके
साखी री मन मौर सा नाचे
लाख जन्म का सखी मोरो साजन
अन्देशबा लागि जारि मिझा आजन
मोटरवा चढ़ल घर बाजन
साखी री मन मौर सा नाचे
आज अंगनवा "गुरु" पडी चरणा
कोने नगरिया छोड़बा धरणा
जेही पैदल चलब घर आवे
साखी री मन मौर सा नाचे ......
साखी री मन मौर सा नाचे
माई री मन मोरो यु अकुलावे
आँखों के कोनो में सपने सजावे
घोड़बे चढ़ल घर आवे
साखी री मन मौर सा नाचे ....
श्याम संगे जब सन्नर महके
मुतियन आंसू जानैत दहके
कथिये चढ़ल घर चहके
साखी री मन मौर सा नाचे
लाख जन्म का सखी मोरो साजन
अन्देशबा लागि जारि मिझा आजन
मोटरवा चढ़ल घर बाजन
साखी री मन मौर सा नाचे
आज अंगनवा "गुरु" पडी चरणा
कोने नगरिया छोड़बा धरणा
जेही पैदल चलब घर आवे
साखी री मन मौर सा नाचे ......
गुरुवा आ गया रे मेरे लाल
गुरुवा आ गयो रे मेरे लाल ..
आ गयो रे मरे लाल , दिल पे छा गयो रे मेरे लाल ..
दीपक बन उजियारा लाया, बना मृदुल मोम सा ढाल
निर्जन मन तारे पुन नवरंग,सए पूछय सैसव काल
दीप-बाति आपुन संगम, जजमान सा रूप विकाल
संग बती मोहे चांदी जडिया ,भरी भरी सुख तै ताल
कहे "गुरु" जग बाती मोरी , पर ब्रह्म दीया मेरे लाल ............
आ गयो रे मरे लाल , दिल पे छा गयो रे मेरे लाल ..
दीपक बन उजियारा लाया, बना मृदुल मोम सा ढाल
निर्जन मन तारे पुन नवरंग,सए पूछय सैसव काल
दीप-बाति आपुन संगम, जजमान सा रूप विकाल
संग बती मोहे चांदी जडिया ,भरी भरी सुख तै ताल
कहे "गुरु" जग बाती मोरी , पर ब्रह्म दीया मेरे लाल ............
Sunday, August 24, 2008
ऐ प्यार तू मेरे सुधर भी जा
ना भोले पन में मुझको फंसा
ना मैं तेरी ना तू मेरा
इस तरह से मेरा दिल ना जला...
ऐ यार तू मेरे सुधर भी जा
तू है भोला
और मतवाला
तेरी आँखे गोल
मैं डावा दोल
एक बार तों कर तू
मुझसे प्यार
फिर दुनीया में तू
किधर भी जा ............ए प्यार तू मेरे सुधर भी जा
तेरा मन सुन्दर
तेरा दिल सुन्दर
सुन्दरता का तू रखवाला
तू राग बंसंती बना फिरे
मैं हू तेरी मधुशाला
पी प्याले को इस
तरह से तू
कही इसकी खुशबु
बिखर ना जा ........ऐ प्यार तू मेरे सुधर भी जा
ना भोले पन में मुझको फंसा
ना मैं तेरी ना तू मेरा
इस तरह से मेरा दिल ना जला...
ऐ यार तू मेरे सुधर भी जा
तू है भोला
और मतवाला
तेरी आँखे गोल
मैं डावा दोल
एक बार तों कर तू
मुझसे प्यार
फिर दुनीया में तू
किधर भी जा ............ए प्यार तू मेरे सुधर भी जा
तेरा मन सुन्दर
तेरा दिल सुन्दर
सुन्दरता का तू रखवाला
तू राग बंसंती बना फिरे
मैं हू तेरी मधुशाला
पी प्याले को इस
तरह से तू
कही इसकी खुशबु
बिखर ना जा ........ऐ प्यार तू मेरे सुधर भी जा
कभी गलियों में उनकी जाना हों कहीये उनसे की बेवफा......
एक " हकीम" दिल-ए-मुज़तरिब से राह तकता है तुम्हारी ....
ये तुम्हारी प्यार की बाते मिज़्ह्ग़ाँ जिस के ग़म में पशेमा हों आप
वही आफ़त-ए-दिल-ए-हकीम किसी रोज़ हम भी कहते थे किसी से....
अक्सर मेरे साथ तू रहती है तो तन्हाई क्यू रहती है i
ना जाने कहा ये निगाह-ए-आईना-साज़ में छुपी रहती है
मिया हम शेर है औए शेरो की गुर्राहट नहीं जाती
निगाहें भर भी उठी तो खाकसार हों जाती है ज़मी॥
ना होठ खिलते है अब ना तब्बसुम है किसी आँख का
शबनम से आंसू है मेरे और खैल दर्दमंदी है ये रात का ...
मेरी रहगुजर में तू ऐसे मिसाले-शरार ना देख ..
जल जायेगा "हकीम" निरे तिनको का बना है ये ..........
अजीयत-ऐ-जहा की अजार सी जमीं का रहनशी दयार है तू ..
चिरागों कों जलाए रखना अंधेरो में कम ही नजर आता हूँ मैं...
एक " हकीम" दिल-ए-मुज़तरिब से राह तकता है तुम्हारी ....
ये तुम्हारी प्यार की बाते मिज़्ह्ग़ाँ जिस के ग़म में पशेमा हों आप
वही आफ़त-ए-दिल-ए-हकीम किसी रोज़ हम भी कहते थे किसी से....
अक्सर मेरे साथ तू रहती है तो तन्हाई क्यू रहती है i
ना जाने कहा ये निगाह-ए-आईना-साज़ में छुपी रहती है
मिया हम शेर है औए शेरो की गुर्राहट नहीं जाती
निगाहें भर भी उठी तो खाकसार हों जाती है ज़मी॥
ना होठ खिलते है अब ना तब्बसुम है किसी आँख का
शबनम से आंसू है मेरे और खैल दर्दमंदी है ये रात का ...
मेरी रहगुजर में तू ऐसे मिसाले-शरार ना देख ..
जल जायेगा "हकीम" निरे तिनको का बना है ये ..........
अजीयत-ऐ-जहा की अजार सी जमीं का रहनशी दयार है तू ..
चिरागों कों जलाए रखना अंधेरो में कम ही नजर आता हूँ मैं...
Friday, August 22, 2008
Thursday, August 21, 2008
वो रूसियाही आज इन फीजाओ मे
ऐसी हवाओं की बात फिर क्यू है
ऐसी हवाओं की बात फिर क्यू है
कल चीरागो मे तैल हमने भरा
अब ये काली सी रात फिर क्यू है
नींद पर आज लहु के छींटे
मुबागाचो मे साथ फिर क्यू है
तु तसल्ली मे सबसे पुछा फीरा
मेरे हाथ मे हाथ फिर क्यू है
कल किसी बात पर मोहल्ला फूंका
आज मेरे घर ये जमात फिर क्यू है
वो मरा ईक "हकीम" हमले मे
उसके हर्फो मे बात फिर क्यू है..
वो रूसियाही आज इन फीजाओ मे
ऐसी हवाओं की बात फिर क्यू है
ऐसी हवाओं की बात फिर क्यू है
कल चीरागो मे तैल हमने भरा
अब ये काली सी रात फिर क्यू है
नींद पर आज लहु के छींटे
मुबागाचो मे साथ फिर क्यू है
तु तसल्ली मे सबसे पुछा फीरा
मेरे हाथ मे हाथ फिर क्यू है
कल किसी बात पर मोहल्ला फूंका
आज मेरे घर ये जमात फिर क्यू है
वो मरा ईक "हकीम" हमले मे
उसके हर्फो मे बात फिर क्यू है..
Sunday, August 17, 2008
कटई सभई मोहे साल बरस ॥
मधु की चाह में जीवन बीता , मधु मिला मोहे तरस तरस ॥
सुर जीवन सूख गयो भादों सा , सावन चख्या जरस जरस ॥
जीभ स्वाद जेही चखे जनत, स्वाद चढा मोहे करस करस ॥
जा चढी रंग चढाईवे मोपे , रंग रहा युही मोहे उरस उरस ....
तनवा सुख मोहे भला लगा , मनवा सुख मेरा गरस गरस ॥
आज "हकीम" जू मुरख नरवा , ज्ञान ना पायो जरस जरस ....
मधु की चाह में जीवन बीता , मधु मिला मोहे तरस तरस ॥
सुर जीवन सूख गयो भादों सा , सावन चख्या जरस जरस ॥
जीभ स्वाद जेही चखे जनत, स्वाद चढा मोहे करस करस ॥
जा चढी रंग चढाईवे मोपे , रंग रहा युही मोहे उरस उरस ....
तनवा सुख मोहे भला लगा , मनवा सुख मेरा गरस गरस ॥
आज "हकीम" जू मुरख नरवा , ज्ञान ना पायो जरस जरस ....
Saturday, August 16, 2008
सफ़र करते समय उन लोगो के लीये जो दूसरो कों यह नहीं पता चलने देते की वे कोई भजन गा रहे है .....
( एक ही "द" अक्षर से कवीता कवीता बनाई है और दुसरे इस कवीता कों गाते हुए आपके होठ नहीं मिलेगे ...)
दीन दयाल दयालु दयानिधी , दरस दिखाओ दर्शन दो ..
दीन दशा दरसु दयानिधी, दास दोहे दस दर्शन दो..
देख दुखो दिशराह दिखाए , दया दरस दर दर्शन दो ॥
दास द्वारे दुदास दिखे, दूतो दाता द्वार दर्शन दो
देख दिखाए दिनकर दाता , द्वार दीन दुखो दर्शन दो
दासगुरु दल द्वार दिखाते , दास दरस दर दर्शन दो ..
हकीम जी
दीन दशा दरसु दयानिधी, दास दोहे दस दर्शन दो..
देख दुखो दिशराह दिखाए , दया दरस दर दर्शन दो ॥
दास द्वारे दुदास दिखे, दूतो दाता द्वार दर्शन दो
देख दिखाए दिनकर दाता , द्वार दीन दुखो दर्शन दो
दासगुरु दल द्वार दिखाते , दास दरस दर दर्शन दो ..
हकीम जी
Sunday, August 3, 2008
बच्चे बेचारे

जिन्हें देखकर तुम, सजाते दीवारे ।
ये आशा से धूमिल, है बच्चे बेचारे ॥
ये आंसू की धारा , ना बाती ना तैल।
ये रीते चीरागों की, खुरचन का मैल॥
ये गम की है साँसे, जमीदोज आसे
बडो से अक्लमंद, ये बच्चे ज़रा से ।
आँखों का मंजर , बुझी आग जैसे ,
ये खाली से चूल्हे ,जले आग कैसे,
समंदर में मिलते, बने झाग जैसे ,
बने तन पे नासूर,से दाग जैसे ,,
ये नूर-ऐ-अमावश, अँधेरा ये काला ।
जिन्हें ढूँढता ही ,नही है उजाला ,,
ये आंसू शर्म के , गरीबी ने फेंके ॥
जिन्हें नाज हिंद पे, कहा वे भी देखे
ये भारत के बेटे ,और माँ के दुलारे ॥
ये आशा से धूमिल, है बच्चे बेचारे,
"हकीम" की आँखों के, है ये सितारे
जिन्हें देखकर तुम , सजाते दीवारे ,
ये आशा से धूमिल है, बच्चे बेचारे
Friday, August 1, 2008
माना की तेरे हाथो में
उल्फत की ये डोर है
पर दिल में तेरे कुछ है
ओर होठो पे कुछ और है
माना की तेरी दीद के
कुछ आशकार राज है
स्नेह निर्झर सा पल्लवित
पल स्पन्दन चकौर है
तू गुल-ऐ-नगमा बेमजा
वस्ल -ऐ-नज़र न्याज़ है
अलख अकेर आखर
जेही प्रेम शौर है
प्राण रूप पावन धरा
वो शाम अभी दूर है
हिरदे आशा तपती धुप
दुपहरी सी और है
जीस्त-ऐ-हकीम बेवफा
पर शम्मा तजदीद है
इश्के सलासिल नूर पे
तज़लीले दीदे कोर है ..............
..गुरु कवी हकीम हरी हरण "हथौडा" हिन्दुस्तानी ..31.08..2008
उल्फत की ये डोर है
पर दिल में तेरे कुछ है
ओर होठो पे कुछ और है
माना की तेरी दीद के
कुछ आशकार राज है
स्नेह निर्झर सा पल्लवित
पल स्पन्दन चकौर है
तू गुल-ऐ-नगमा बेमजा
वस्ल -ऐ-नज़र न्याज़ है
अलख अकेर आखर
जेही प्रेम शौर है
प्राण रूप पावन धरा
वो शाम अभी दूर है
हिरदे आशा तपती धुप
दुपहरी सी और है
जीस्त-ऐ-हकीम बेवफा
पर शम्मा तजदीद है
इश्के सलासिल नूर पे
तज़लीले दीदे कोर है ..............
..गुरु कवी हकीम हरी हरण "हथौडा" हिन्दुस्तानी ..31.08..2008
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