
उम्र का स्पर्श
नदी की तीव्र
धारा का स्पर्श
तटबंध के
जर्जर वर्क्ष को
हर रोज़ मीठा सा
सरसराता
मौत का अहसास
दे देता है
खोखली हों चुकी जड़े,
उस ठंडी जमीन को
बीमार आदमी की
मुठ्ठी तरह जकड़े है ,
पर पानी की धारा
हर रोज़
चपल शीकारी की भाँती
दाव लगा कर
खोखली जडो को
हर रोज़ पकडे है...............
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