Monday, June 16, 2008

उम्र का स्पर्श




उम्र का स्पर्श

नदी की तीव्र
धारा का स्पर्श
तटबंध के
जर्जर वर्क्ष को
हर रोज़ मीठा सा
सरसराता
मौत का अहसास
दे देता है
खोखली हों चुकी जड़े,
उस ठंडी जमीन को
बीमार आदमी की
मुठ्ठी तरह जकड़े है ,
पर पानी की धारा
हर रोज़
चपल शीकारी की भाँती
दाव लगा कर
खोखली जडो को
हर रोज़ पकडे है...............

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