Friday, June 20, 2008

रीते चीराग


रीते चीराग


उजड़ता सा बचपन
ये टूटे से फूल
भूखी है आशा
है कीस्की ये भूल .
आशा नज़र की
कयू टूटी हुई
कीश्मत है इनकी
कयू फूटी हुई
सपनो की दुनीया
कयू लूटी हुई
इंसा की हालत
जह्नूम बनी
पोछेंगा कौन
इसकी ये धुल ....................ये टूटे से फूल
ते भारत का बचपन
गरीबी के दाग

ये बाती से खाली
ये रीते चीराग
नीगाहे ै कैसी टुकुर टुकुर
लहू सने जैसे
गोमाता के खुर
जीवन है इनका
एक खाली कफ़न
सपने हुए कयू
इनके दफ़न
बाते गर मैं
इनकी करू
जीवन इनका करू मैं
बसीयत
मुझी को देती है
दुनीया नसीयत
करता "हकीम" बाते
कीस्की ये फीजुल ........................ये टूटे से फूल

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