Saturday, October 11, 2008

ये अँधेरा घना
नग तम् से बड़ा
उसका सीना तना
लौ डरने लगी
हौसला ना छिना
कर के हिम्मत कों वो
बढ़ के यु खिल गई
अँधेरा भी गया
नग की नींव हिल गई
नतमस्तक पहाड़
अँधेरे की दहाड़
कंदन से काह
सारी तिम छिल गई

कंदन =पत्थर फोड़ना
काह= अन्धकार से बाहर निकलना

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