Tuesday, October 14, 2008

पथ प्रेम सजा तू अब राधा ,
माधव तबहू नाही कातर हिरदे ,प्रेम बढ़त होय विरह आधा ।
अब कै तार तिये सूत नोका , सूनुह प्रात भावः विहल साधा
तोरी रटु बिछिया सी बतीया ,लीये जिए नछत्र सा अनुराधा
इबिही प्रेम पथि तोई विधिना राखो ,जोई चुनर सुई हुई बाधा
अपवश नयन ना चितोर भरउ अबू ,करी सूनी बात सुनो माधा
दियौ अभेद "हकीम" गती दाउँ ,समरथ सुमिरन जो बलि राधा ......

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