दर्रों के इन क़दमों में
भंगुर है संसार
तेरी इस दुनिया में
रखा क्या है यार
लज्जारुण चेहरा
ये शहर नख़्लिस्तान
बनजारों देश में
नहीं होता कब्रिस्तान
दफ़न सब रश्मे यहाँ
भूखे भेड़िए सा प्यार
तेरी इस दुनिया में
रखा क्या है यार
सौदा-ए-मुहब्बत की
बातो के सहारे
रोते सर पकड़ के
दुखो के सब मारे
धोखा इनकी फितरत
फरेब इनकी यारी
नकली से है चहरे
लोमड की होशयारी
तेरी इस दुनिया में
इनकी ही भरमार
तेरी इस दुनिया में
रखा क्या है यार
चार दिन बसेरा
और बाते लम्बी चोडी
इन्सां के आँगन में
खुशिया कितनी थोड़ी
सुबह जागे खुशिया
दोपहर तक है तपती
शाम आते आते
सारी खुशिया थकती
सीने से लगाए तू
काहे ये गुब्बार
तेरी इस दुनिया में
रखा क्या है यार ........गुरु कवि हकीम
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