पथ प्रेम ये सीध सामान बना ,
छूटे भय-शंसय और खोट नहीं
चित चंचल मन व्याकुल बाते ,
नि:संशय ह्रदय कोई चोट नहीं
जीवन लतिका सुर मधुर मुक्त ,
ये गतिमय स्त्रोत झंझात नहीं
कुछ शेष रहा शैशव यौवन दर्पण,
ये अवशेष चांदनी रात नहीं
अधिराए बदरीया काली क्यू ,
ये मनुजोचित प्रीत सी बात नहीं
हृदय में ये छल क्यों पनपे ,
कहता पल पल सुधि साथ नहीं
तुम नित नित रचना रचती हों ,
यहाँ प्राणों का आघात नहीं
तुम सब कुछ छीन चली पाती ,
हृदय में खुशी की बात नहीं
गुरु कवि हकीम
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