Tuesday, October 14, 2008

पथ पेम

पथ प्रेम ये सीध सामान बना ,
छूटे भय-शंसय और खोट नहीं

चित चंचल मन व्याकुल बाते ,

नि:संशय ह्रदय कोई चोट नहीं

जीवन लतिका सुर मधुर मुक्त ,

ये गतिमय स्त्रोत झंझात नहीं

कुछ शेष रहा शैशव यौवन दर्पण,

ये अवशेष चांदनी रात नहीं

अधिराए बदरीया काली क्यू ,

ये मनुजोचित प्रीत सी बात नहीं

हृदय में ये छल क्यों पनपे ,

कहता पल पल सुधि साथ नहीं

तुम नित नित रचना रचती हों ,

यहाँ प्राणों का आघात नहीं

तुम सब कुछ छीन चली पाती ,

हृदय में खुशी की बात नहीं



गुरु कवि हकीम

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