दुनिया कहती है कि पीना छोड दो
ये क्यू नहीं कहती की जीना छोड दो
नुमाया जिन्दगी की तल्खिया लिए
जवां सीने में धड़कने जोड दो
मिज़ाज-ए-अजिजि हमें क्या पता
कोई आके मेरे दिल में वो छोड़ दो
भीगी पलको से हम आज रोते रहे
दरगाय-ऐ-मोहब्बत कोई मोड़ दो
सोचता हूँ बसर घर कोई मैं करू
पेश-ऐ-नश्तर जिगर अब कोई तोड़ दो
गिराँबार तेरी नजर का सिला
तसव्वुर में आके शम्मा छोड़ दो
यख़बस्ता उदासी है दिल में "हकीम"
शुआ जीस्त कोई मुझे मोड़ दो ...
ये क्यू नहीं कहती की जीना छोड दो
नुमाया जिन्दगी की तल्खिया लिए
जवां सीने में धड़कने जोड दो
मिज़ाज-ए-अजिजि हमें क्या पता
कोई आके मेरे दिल में वो छोड़ दो
भीगी पलको से हम आज रोते रहे
दरगाय-ऐ-मोहब्बत कोई मोड़ दो
सोचता हूँ बसर घर कोई मैं करू
पेश-ऐ-नश्तर जिगर अब कोई तोड़ दो
गिराँबार तेरी नजर का सिला
तसव्वुर में आके शम्मा छोड़ दो
यख़बस्ता उदासी है दिल में "हकीम"
शुआ जीस्त कोई मुझे मोड़ दो ...
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