जिन ख्वाब में तू अब सोती है
वहा हिस्स-ए-लताफ़त रोती है
वो आयेगा तबरीज ना कर
ये तल्ख मुबाहिस दीद का कर
पा जाए मुरादे शायद तू
जब चाँद ज़रा माध्यम नीकले
जब चाँद तेरा माध्यम नीकले
रात की स्याही रीत गई
आदाब मोहब्बत जीत गई
असुवन आँखे अब पोंछ ज़रा
अज़मत एहबाब नींद भरा
तू देख उठा कर सरमाया
इन मधुमासी रातो में
कोई मन के तार झंझोरेगा
जब चाँद तेरा धीरे निकले
जब चाँद ज़रा माध्यम नीकले
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