Tuesday, October 21, 2008

तस्व्वुर वफ़ा....

तस्व्वुर वफ़ा एक पशेमान सी
मेरे शब्दों में है वो कहानी बहुत
जि़न्दगानी बादा सागर है जवां
मेरे शब्दों में है वो जवानी बहुत
इन्तेज़ा बेकरारी तवज्ज़ुन बढे
मेरी धड़कन है मैं वो रवानी बहुत
बीक चुके दिल के अरमान कई मोड़ पर
रास्ते की डगर है सुहानी बहुत
ये मोहब्बत के नग्मे मुतिरब से है
दुनिया है इनकी दीवानी बहुत
फकत उम्र अब तो फना हों चुकी
मेरे शब्दों में अब भी जवानी बहुत...
अभी छोड़ ना दिल के नग्मे 'हकीम'
हयात-ऐ-वफ़ा जिंदगानी बहुत

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