Tuesday, October 21, 2008

अशकारो में जलते है अब
ईमान की हालत ठीक नही
गर्द भरी इन राहो पर
इंसान की हालत ठीक नही......
खुशिया लूटती दहशत बढ़ती
हर सोच यहाँ मरकज चढ़ती
नफ़रत ने मोहब्बत को घूरा
शैतान की नियत ठीक नही
गर्द भरी इन राहो पर
इंसान की हालत ठीक नही .......
तम्हीद-ए-सितम तासीर यहाँ
ख़ुद ही होश गवा बैठे
होश-ए-ख़िल्वत हुई रुखसत
नजर--सय्याद जवां बैठे
सौदाइयो की बस्ती में
सामान की कीमत ठीक नही
गर्द भरी इन राहो पर
इंसान की हालत ठीक नही...........
रहबर छूटते दामन बटते
ख़ुदनिगरी की अंगड़ाई है
मुश्किल आलम रूश्वाई का
झुर्मुट की ये गहराई है
सरमायो का ये मन्दिर है
बैठी सूरत एक भोली सी
सरमायो के इस मन्दिर में
भावान की सूरत ठीक नही
गर्द भरी इन राहो पर
इंसान की हालत ठीक नही..........
एकाकीपन में जीते है
कशिश-ओ-जज़्ब की बात कहा
मायूसी की इस नगरी में
ख़ामोश फ़ज़ाओं सी रात यहाँ
तासीर तसव्वुर चूर हुए
टकरा ही हम टूट गए
टूटा मोटी बिखरी माला
जख्म यहाँ नासूर हुए
हर चीज में मिलती सैय्यारी
नेकी की हालत ठीक नही
गर्द भरी इन राहो पर
इंसान की हालत ठीक नही...........


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