एतबार तो कर यु चुप ना रहो दानिश्ता शिकायत भूल भी जा
खामौश लबो कों खोल भी दे बानिश्ता ये शिकवा भूल भी जा
तकमील-ऐ-जफा अब याद ना कर अंजाम कयामत भूल भी जा
नजरो की सदा टकरा के ना मुड तासीर गुरेजां भूल भी जा
हर रोज़ नहीं एक रोज़ सही दहशत की ये बाते भूल भी जा
हमराज फकत इनकार ना कर नाहक ये सितम भूल भी जा
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1 comment:
bahut hi badhiyaa....
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