हाथिये चढ़ल आयो साजन
साखी री मन मौर सा नाचे
माई री मन मोरो यु अकुलावे
आँखों के कोनो में सपने सजावे
घोड़बे चढ़ल घर आवे
साखी री मन मौर सा नाचे ....
श्याम संगे जब सन्नर महके
मुतियन आंसू जानैत दहके
कथिये चढ़ल घर चहके
साखी री मन मौर सा नाचे
लाख जन्म का सखी मोरो साजन
अन्देशबा लागि जारि मिझा आजन
मोटरवा चढ़ल घर बाजन
साखी री मन मौर सा नाचे
आज अंगनवा "गुरु" पडी चरणा
कोने नगरिया छोड़बा धरणा
जेही पैदल चलब घर आवे
साखी री मन मौर सा नाचे ......
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