Monday, August 25, 2008

घर आवे साजन

हाथिये चढ़ल आयो साजन
साखी री मन मौर सा नाचे
माई री मन मोरो यु अकुलावे
आँखों के कोनो में सपने सजावे
घोड़बे चढ़ल घर आवे
साखी री मन मौर सा नाचे ....
श्याम संगे जब सन्नर महके
मुतियन आंसू जानैत दहके
कथिये चढ़ल घर चहके
साखी री मन मौर सा नाचे
लाख जन्म का सखी मोरो साजन
अन्देशबा लागि जारि मिझा आजन
मोटरवा चढ़ल घर बाजन
साखी री मन मौर सा नाचे
आज अंगनवा "गुरु" पडी चरणा
कोने नगरिया छोड़बा धरणा
जेही पैदल चलब घर आवे
साखी री मन मौर सा नाचे ......

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