कटई सभई मोहे साल बरस ॥
मधु की चाह में जीवन बीता , मधु मिला मोहे तरस तरस ॥
सुर जीवन सूख गयो भादों सा , सावन चख्या जरस जरस ॥
जीभ स्वाद जेही चखे जनत, स्वाद चढा मोहे करस करस ॥
जा चढी रंग चढाईवे मोपे , रंग रहा युही मोहे उरस उरस ....
तनवा सुख मोहे भला लगा , मनवा सुख मेरा गरस गरस ॥
आज "हकीम" जू मुरख नरवा , ज्ञान ना पायो जरस जरस ....
मधु की चाह में जीवन बीता , मधु मिला मोहे तरस तरस ॥
सुर जीवन सूख गयो भादों सा , सावन चख्या जरस जरस ॥
जीभ स्वाद जेही चखे जनत, स्वाद चढा मोहे करस करस ॥
जा चढी रंग चढाईवे मोपे , रंग रहा युही मोहे उरस उरस ....
तनवा सुख मोहे भला लगा , मनवा सुख मेरा गरस गरस ॥
आज "हकीम" जू मुरख नरवा , ज्ञान ना पायो जरस जरस ....
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