वो रूसियाही आज इन फीजाओ मे
ऐसी हवाओं की बात फिर क्यू है
ऐसी हवाओं की बात फिर क्यू है
कल चीरागो मे तैल हमने भरा
अब ये काली सी रात फिर क्यू है
नींद पर आज लहु के छींटे
मुबागाचो मे साथ फिर क्यू है
तु तसल्ली मे सबसे पुछा फीरा
मेरे हाथ मे हाथ फिर क्यू है
कल किसी बात पर मोहल्ला फूंका
आज मेरे घर ये जमात फिर क्यू है
वो मरा ईक "हकीम" हमले मे
उसके हर्फो मे बात फिर क्यू है..
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