Friday, August 1, 2008

सड़क के खाली पन्ने 
दूर तक 
निगाहों का का सफर 
और विचरण करते हुए 
हमसायो के बीच 
आस्तित्व की रक्षा को 
आतुर इंसानी सोच 
बहुत बीच के 
फासलों से 
गुजरता हुआ 
फिर आ जाता है 
परिधी के चक्कर सा काटता 
उसी बिन्दु पर 
जहा से आरम्भ हुआ था 
सोच का सफर 
शुन्य की खोज में 
रीते हुए खाली 
पन्नो पर...

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