गुरुवा आ गयो रे मेरे लाल ..
आ गयो रे मरे लाल , दिल पे छा गयो रे मेरे लाल ..
दीपक बन उजियारा लाया, बना मृदुल मोम सा ढाल
निर्जन मन तारे पुन नवरंग,सए पूछय सैसव काल
दीप-बाति आपुन संगम, जजमान सा रूप विकाल
संग बती मोहे चांदी जडिया ,भरी भरी सुख तै ताल
कहे "गुरु" जग बाती मोरी , पर ब्रह्म दीया मेरे लाल ............
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