Monday, August 25, 2008

जब रात हुई बरसात हुई
भीगा मन भीगी बात हुई
रोने के लीये सारा जग है
हसने की ना कोई बात हुई
जब गम की रेल नीकलती थी
यहा पटरीयो सी हालात हुई
जब सुबह हुई बादल पुछे
हकीम क्या कोई बात हुई
आंसू नीकले तन्हाई मे
मन पीडा सी जब साथ हुई

1 comment:

Anonymous said...

Nice Poem
Hakim Ji....
By Kumar Dev