Saturday, August 16, 2008

सफ़र करते समय उन लोगो के लीये जो दूसरो कों यह नहीं पता चलने देते की वे कोई भजन गा रहे है .....

( एक ही "द" अक्षर से कवीता कवीता बनाई है और दुसरे इस कवीता कों गाते हुए आपके होठ नहीं मिलेगे ...)



दीन दयाल दयालु दयानिधी , दरस दिखाओ दर्शन दो ..

दीन दशा दरसु दयानिधी, दास दोहे दस दर्शन दो..

देख दुखो दिशराह दिखाए , दया दरस दर दर्शन दो ॥

दास द्वारे दुदास दिखे, दूतो दाता द्वार दर्शन दो

देख दिखाए दिनकर दाता , द्वार दीन दुखो दर्शन दो

दासगुरु दल द्वार दिखाते , दास दरस दर दर्शन दो ..





हकीम जी

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