जब रात हुई बरसात हुई
भीगा मन भीगी बात हुई
रोने के लीये सारा जग है
हसने की ना कोई बात हुई
जब गम की रेल नीकलती थी
यहा पटरीयो सी हालात हुई
जब सुबह हुई बादल पुछे
हकीम क्या कोई बात हुई
आंसू नीकले तन्हाई मे
मन पीडा सी जब साथ हुई
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1 comment:
Nice Poem
Hakim Ji....
By Kumar Dev
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