ऐ प्यार तू मेरे सुधर भी जा
ना भोले पन में मुझको फंसा
ना मैं तेरी ना तू मेरा
इस तरह से मेरा दिल ना जला...
ऐ यार तू मेरे सुधर भी जा
तू है भोला
और मतवाला
तेरी आँखे गोल
मैं डावा दोल
एक बार तों कर तू
मुझसे प्यार
फिर दुनीया में तू
किधर भी जा ............ए प्यार तू मेरे सुधर भी जा
तेरा मन सुन्दर
तेरा दिल सुन्दर
सुन्दरता का तू रखवाला
तू राग बंसंती बना फिरे
मैं हू तेरी मधुशाला
पी प्याले को इस
तरह से तू
कही इसकी खुशबु
बिखर ना जा ........ऐ प्यार तू मेरे सुधर भी जा
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1 comment:
ऐ प्यार तू मेरे सुधर भी जा
बहुत खूब हकीम जे, सुंदर रचना है! Keep it up.
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