Sunday, August 31, 2008

इशक मासूम...



जीस्त नासूर-ऐ-गुल-ऐ-बां में जिगर सोता है

पाक दामन के गिरेबां में वस्ल होता है
शर्म दामन में फना बंदगी सा रोता है
इशक मासूम जवानी में फ़ना होता है
वस्ल मासूम कहे मुझसे सदा
जिन्दगी तेरी .... बंदगी मेरी......................गुरु कवि हकीम...