Saturday, July 5, 2008

इब्तीदा -ऐ-इश्क

बस एक सुराग-ऐ-ख्वाब में मीसल-ऐ-चीराग नूर है .
इब्तीदा -ऐ-इश्क सा सफ़र,नीशान-ऐ इश्क दूर है
हक़ ना मीला है हीज्र में, दर्द मीन्नतकश जरुर है
ये लब खुले "हकीम के ,हकीकत-ऐ-ससब सरुर है .......