skip to main | skip to sidebar

सच और शिकायत

दोस्तों मुझे नहीं पता मेरी कवीता कैसी है ...जैसी भी आपके सामने है .. मगर जैसी भी हों आप मुझे जरूर लीखना या बताना परंतु एक वीनती है सच बताना ... मुझे अपनी आलोचना सुन ना बहुत अच्छा लगता है .. आलोचना से मुझे अपने आप को सुधारने का मौका मीलता है ..मेरे अन्दर नीखार आता है ... आलोचना वोही काम करती है जैसे मेल लगे कपडे पर साबुन....

Friday, July 4, 2008

आवाज़: संगीत दिलों का उत्सव है - संगीत के नए सत्र की पहली सौगात

आवाज़: संगीत दिलों का उत्सव है - संगीत के नए सत्र की पहली सौगात

suro kee ye duneeyaa ,
suro se hai naataa
bhaa gaye re tere sur
kasam se dil me hamaare
chha gaye re tere bol
sach me man me hamaare ...

bahut sundar paryaas..
jahaa bastee hai aash ....
Posted by हकीम जी at 10:05 PM

1 comment:

शैलेश भारतवासी said...

बहुत खूब हकीम जी

July 5, 2008 at 11:05 PM

Post a Comment

Newer Post Older Post Home
Subscribe to: Post Comments (Atom)

Blog Archive

  • ►  2009 (9)
    • ►  January (9)
  • ▼  2008 (88)
    • ►  November (1)
    • ►  October (21)
    • ►  September (8)
    • ►  August (20)
    • ▼  July (15)
      • पतझड़ और पहाड़
      • ---स्त्री बोध-----जीवन पथ केलम्बे गुजरते रास्तो पर...
      • चाह
      • गुरु
      • हकीम का रहस्यवाद
      • घुन लगी परवाह
      • तलाश
      • वो रूसियाही आज इन फीजाओ मे ऐसी हवाओं की बात फिर ...
      •  वो हसे इस भरी दुपहरी मे वल्ला कुछ है जो दील खुमार...
      • नीन्द आती ही नही
      • इब्तीदा -ऐ-इश्क
      • जन्म दीन मुबारक
      • आवाज़: संगीत दिलों का उत्सव है - संगीत के नए सत्र क...
      • दुमीया कड़वा नीम
      • कुछ अशीयार
    • ►  June (23)

About Me

My photo
हकीम जी
जन्म ...12 अगस्त ,1962 में हुआ... शुरुआती पढाई गाव में की तथा ऍम. ऐ. ( भूगोल) . वर्तमान में दीलली में कार्यरत हूँ... कवीता का शौक बचपन से ही था ..1994 में "जंग लगे पत्थर" नाम से कवीता संग्रह प्रकाशीत हुआ ..समयाभाव के कारण कवीता कों इतना तो समय नहीं दे पाता हूँ मगर आज भी कवीता मेरे हर्दय में बस्ती है ..कवीता के अलावा चीत्रकारी,संगीत,गायन,अस्ट्रोलोजी ,पर्वतारोहण और दुनीया जहान की पुस्तके पढने का बहुत शौक रहा है...मैं जब भी कभी जीवन से उदास होता हूँ अपने कवीमन से बाते करके अपने आप कों उबार लेता हूँ.... दोस्तों मुझे नहीं पता मेरी कवीता कैसी है ...जैसी भी आपके सामने है .. मगर जैसी भी हों आप मुझे जरूर लीखना या बताना परंतु एक वीनती है सच बताना ... मुझे अपनी आलोचना सुन ना बहुत अच्छा लगता है .. आलोचना से मुझे अपने आप को सुधारने का मौका मीलता है ..मेरे अन्दर नीखार आता है ... आलोचना वोही काम करती है जैसे मेल लगे कपडे पर साबुन....
View my complete profile