
हिन्दी काव्य जगत पर नारी मन ,भाव ओर शब्दो के अद्भुत हस्ताक्षर. मन के बहुत करीब से नीकलती हुई इनकी कविता अपने भाव ओर अहसास को ह्रदय
के पास छोड जाती है.. इनका जन्म विदिशा मे हुआ जो मध्यप्रदेश में भोपाल के पास एक बहुत छोटा सा शहर है ..केमिस्ट्री में अपनी शिक्षा पूरी की
और आजकल यहाँ अंतर राष्ट्रीय विद्यालय में हिन्दी भाषा को सब तक पहुँचा रही है...
तलाश.........
जिसकी तलाश मुझे भटकाती रही,
चाह में खुद को जलाती रही वो सुख तो कभी था ही नहीं
बेसबब उन पथरीली राहों पर चलकर
खुद को ज़ख़्मी बनाती रही,
कभी गिरती कभी सम्हल जाती
सम्हल कर चलती तो कभी लड़खड़ाती
लड़खड़ाते कदमो को देख लोग मुस्कराते
कोई कहता शराबी तो कई पागल बुलाते
पर कोई न होता जो मुझे सम्हाल पाता
गिरे देखकर अपना हाथ बढ़ाता
जिसकी तलाश में खुद को गिराती रही
वो सुख तो कभी था ही नहीं
अधूरे एहसास के साथ मैं चलती रही,
मिलन की आस लिए कल – कल बहती रही
कभी किसी झील, तो कभी नहर से मिली ,
कभी झरने में मिलकर संग संग गिरी
मिला न वो , जो मुझमे मिलकर मुझे संवारे
मेरे रूप का श्रगार कर इसे और निखारे
जिसके लिए अपने वजूद को मिटाती रही
वो सुख तो कभी था ही नहीं................श्रद्धा जैन.
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