Saturday, January 10, 2009

कौन कहता है .............

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कौन कहता है
की तुमसे दूर हूँ,
मेरी सासों और धड़कन में
ये सोपान निरंतर तुम्हारे
साथ होता है,
पंखों पर उड़ के
ज्योति स्पर्श हित
सदैव मन में सोता है,
प्रेमी पतंग की भांती
युही आस पास
प्रवृतियाँ में बसा
रहता है,
कौन कहता है ..

मूक प्राणों में
ये क्षण निठुर नहीं होते,
ना ही कज्जल-दिशा में
किसी के ख्वाब खोते,
उर का ये उपवन
नवनिधियोंमय सा भारी है,
और तेरी सुदगी में
ये आँगन सूना नहीं
बिन श्रृंगार-सदन जारी है,
वही ये अहसास होता है
कौन कहता है ॥ ........................................

........गुरु कवि हकीम...


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