दर्द क्यू देखे,
गम है तेरे ,हम भी तेरे.............
ये हक़ीकत से जो सवाल ,
आज क्यू पूछे
फ़लकपे मेरे रहम भी तेरे
तरसती आज जुबां ,टपक ऐ शम आँसू
परवाने डरते है तितली के पर मासू
नहीं मिन्नत-कश तेरी ,
ये जुफ्त्जू है मेरी
नर्गिस के सीने में दस्तूर-ए-ज़बाँ देखे
गुफ्तगू मेरी ,हर्फ़ भी मेरे
गम है तेरे हम भी तेरे.....................
ये जुनूँ बाक़ी अब तो, लबरेज हों तू बाक़ी
जन्नत की नमाजो में ,बन जाऊ मैं साकी
ये हसीन जो हस्ती है ,नापायादार रहती
आबे-बक़ाए गम के क्यू बार बार देखे
ये आबो नशा तेरा ,प्याले भी तेरे
गम है तेरे, हम भी तेरे....................................
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