Sunday, January 11, 2009

पयामे दर्द ''''''''''''''''''''''''''''''''

इन आँखों की जवानी में पयामे दर्द भी है

और दहकते ख्वाब भी है किसी मंजर के

गगन की दामिनी का क्‍या करूँ मैं "हकीम"

बादास्ता सीने में दाग भी है उसके खंजर के ........


........गुरु कवि हकीम॥

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